Guava in Hindi
इस पोस्ट में हम Guava in hindi,Amrud,Amrud khane ke fayde के बारे में जानेंगे।अमरूद के फल से सब परिचित हैं. इसका गूदा लाल और सफेद दो रंगों में मिलता है। स्वाद में भी खट्टा, मीठा और फीका दो-तीन प्रकार का होता है।
वर्षा ऋतु की अपेक्षा शरद ऋतु के फल अधिक मधुर तथा स्वादिष्ट होते हैं। यह कृषिजन्य तथा वन्यज दोनों अवस्थाओं में पाया जाता है।अमरूद को सेब का प्रतिद्वन्दी, तथा गरीबों का सेब कहकर पुकारा जाता है ।
अमरूद भारत का फल नहीं है, अपितु इसका जन्मस्थान अमेरिका है । श्री जी० डियक के कथना- नुसार सफेद और लाल, दो प्रकार के अमरूद सम्भ- वतः पुर्तगाल निवासी अपने साथ हिन्दुस्तान लाये ।
अमरूद को हिन्दी में अमरूद व सफरी; अंग्रेजी में गोवावा (Guava ); तथा लैटिन में सीडियम गोवावा (Psidium Guyava) कहा जाता है ।
इसका वृक्ष 15 से 25 फुट तक ऊंचा होता है। पत्ते 3-6 इंच तक लम्बे छोटी-छोटी टहनियों पर कहीं विपरीत और कहीं एकान्तर लगे रहते हैं। काण्ड मृदु, बहुशाखीय तथा पुष्प छोटे पाये जाते हैं।
- रासायनिक संघटन
इसकी जड़ व छाल में टेनिक एसिड काफी मात्रा में रहता है। इसके अतिरिक्त कैल्सियम आक्जेलेट के रवे भी इसमें पाये जाते हैं। इसके पत्तों में राल, वसा, टेनिन, उड़नशील तेल, हरित और खनिज लवण होते | अमरूद के पेड़ में फास्फोरिक और अम्ल सत्व के साथ मिले हुए चूना तथा मैगनीज वर्तमान होते हैं। इसमें विटामिन बी तथा सी दोनों पाये जाते हैं।
अमरुद के फल, रूचिवर्द्धक, शुक्रवर्द्धक, हृदय को बल देने वाले है। ये रेचक तथा कफ निःस्सारक है।
अमरूद में जल ७६%, प्रोटीन १.५%, कार्बो- हाइड्रेट १४.५%, रेशा ६.९%, कैल्सियम ०.०१%, खनिज पदार्थ ०.६%, फॉस्फोरस ०.४४%, चर्बी ०.२%, लोहा ०.१ मिलीग्राम प्रतिग्राम, विटामिन सी २६९ मिलीग्राम होता है । इसमें विटामिन ए व बी होते हैं ।
अमृतफल यानी अमरूद, सुस्वादु, कुछ खट्टा, ठंढा, चिकना, रुचिकर, वीर्यवर्द्धक, त्रिदोषनाशक, तीखा तथा भारी, कुछ कफ तथा वात बढ़ाने वाला एवं उन्माद- नाशक है।
यह हृदय, मस्तिष्क तथा आमाशय को बल देता है। इससे शरीर की अनावश्यक उष्णता कम होती है । स्फूर्ति और शक्ति देकर यह तृषा को शान्त करता है । इससे शरीर का वर्ण स्वच्छ होता है । कोष्ठबद्धता में अमरूद अति गुणकारी है। इसके सतत सेवन से चर्म रोग दूर होते हैं । अमरूद के सेवन से रक्त शुद्ध बनता है और उसमें वृद्धि भी होती है।
अमरूद अनेक प्रकार के रासायनिक प्रयोग में काम आता है, क्योंकि इसमें राल और कैल्सियम का अंश मिला होता है।
यूनानी चिकित्सा में अमरुद को रूखा कहा गया है। कुछ चिकित्सक इस फल को तर, मधुर और उष्ण बताते हैं। परन्तु इस बात में सभी चिकित्सक और आहारशास्त्री एकमत हैं कि यह हृदय को बल देने वाला, 'आमाशय तथा पाचनशक्ति को ठीक करने वाला, तथा स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त उपयोगी फल है। यह मवाद का अवरोधक तथा अम्लता के कारण प्यास तथा पित्त को शान्त करनेवाला है। इसमें फेफड़ों को स्थूल और सशक्त बना देने की बहुत बड़ी क्षमता है।
- अमरूद खाने का सही तरीका-How to eat Guava
अमरूद के उपर्युक्त गुणों का पूर्ण लाभ पाने के लिये यह आवश्यक है कि इसे खाली पेट ही खाया जाय।
इस सम्बन्ध में मतभेद है कि अमरूद को बीज समेत खाना चाहिए अथवा बीज निकाल कर। कहा तो यह जाता है, जो पता नहीं कहाँ तक सही है, कि अमरूद को बीज सहित खाने से यदि कोई बीज उपान्त्र में अटक जाय तो वह उपान्त्र के पीड़ा का कारण होता है। अतः अच्छा यह है कि यदि अमरूद बीज समेत खाया जाय तो बीजों को खूब चबा लेने के बाद ही उन्हें निगला जाय ।
- Amrud khane ke fayde-अमरुद खाने के फायदे
1.आधासीसी)-इस रोग में हरे कच्चे अमरूद को प्रात:काल पत्थर पर घिसकर जो लुगदी तय्यार हो उसे दर्द के स्थान पर लेप करें, आधासीसी का दर्द दूर हो जावेगा। यह प्रयोग सूर्य के उगने के पहले ही करना चाहिए । दर्द उठने से पहले यदि इस प्रयोग को किया जायेगा तो दर्द उठेगा ही नहीं । यदि एक दिन में लाभ न हो तो २-३ दिन इस प्रयोग को करना चाहिए ।
2.नेत्र-रोग)-अमरूद की कोमल पत्तियों को लाकर और पीसकर लेप या पुल्टिस बना लें और उसका प्रयोग आँख आने, जल-स्राव, तथा पीड़ा में करें तो ये सब रोग आसानी से दूर हो जायँगे । यदि लेप अथवा लुगदी में थोड़ी सी फिटकरी और अफीम भी मिला दी जाय तो लाभ अति शीघ्र होता है ।
3.गठिया वात)-गठिया वात की सूजन पर अमरूद के पत्तों की लुगदी बनाकर लेप करने से सूजन मिट जाती है ।
4.अफरा)-पके अमरूद को सोंठ, काली मिर्च व सेंधा नमक के साथ सेवन करने से अफरा आदि पेट के रोग नहीं होते। भोजन के पूर्व यदि इसका सेवन किया जाय तो यह दस्त को बाँधता है और भोजन के बाद सेवन करने से पाचन-क्रिया में वृद्धि करके पेट को साफ रखता है।
5.खाँसी)-अमरूद के ५-७ ताजे हरे पत्तों को लेकर पानी में उबालें, फिर उसमें चाय की तरह दूध व चीनी मिलाकर पीवें तो अमरूद के पत्तों की इस चाय से खाँसी ठीक हो जायगी। अमरूद को गरम बालू में भूनकर खाने से भी खाँसी मिटती है।
6.दाँत का दर्द)-अमरूद के पत्तों के काढ़े से कुल्ला करने से दाँत का दर्द दूर हो जाता है।
7.पागलपन)-अमरूद का नियमित सेवन कुछ दिनों तक करने से पागलपन ठीक हो जाता है, क्योंकि अमरूद के प्रयोग से मस्तिष्क की मांसपेशियों को शक्ति प्राप्त होती है, तथा उसमें स्थित अनावश्यक गर्मी निकल जाती है।
- Amrud in Hindi
8 .मादक द्रव्यों का विष)-अमरूद का सेवन करने से अफीम, भाँग आदि का विष नष्ट हो जाता है।
9.खून की खराबी)-रक्त-विकार के कारण अक्सर लोगों को फोड़ा-फुन्सियाँ निकलती हैं। ऐसी दशा में अमरूद का नियमित रूप से सेवन बड़ा लाभ करता है। इससे अंतड़ियों की बढ़ी हुई गर्मी शान्त हो जाती है।
10.मधुमेह की तृषा)-अमरूदों को बारीक काटकर और कटे टुकड़ों को जल में डालकर कुछ देर तक रहने दें, फिर उस जल को छानकर मधुमेह के रोगी को पिलावें तो उसकी तृषा की शान्ति होगी। बहुमूत्र रोग की तृषा में भी यह योग उपकारी है।
11.पुराना जुकाम)-अमरूद का कुछ दिनों तक सेवन करने से पुराने से पुराना जुकाम भी ठीक हो जाता है।
12.पेट का दर्द)-अमरूद की कोमल पत्तियां नमक के साथ खाने से पेट का दर्द मिटता है।
13.मानसिक चिन्ता)-मानसिक चिन्ता से छुटकारा पाने के लिए रातभर एक अमरुद को पानी में डाल रखें। सुबह उठकर खाली पेट उस पूरे अमरुद को खूब चबाकर खा जायें, कुछ ही दिनों में मानसिक चिन्ता से मुक्ति मिल जायगी।
14.मुँह का छाला)-अमरूद की पत्ती और कत्था को पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
15.कब्ज)-जिस किसी को कब्ज की बीमारी हो, मल में दुर्गन्ध हो, कई-कई दिनों तक शौच न होता हो तो उसे अमरूद का सेवन नियमित रूप से करके इन दोषों को दूर करना चाहिए।
16.बढ़ा हुआ पित्त)-अमरूद के बीजों को निकाल कर और पीसकर उसे गुलाब जल और शहद के साथ सेवन करने से बढ़ा हुआ पित्त शान्त हो जाता है ।
17.वीर्यहोनता)-पके अमरूदों को कुचल-पीसकर और उसे दूध में मिलाकर छान ले। फिर उसमें शक्कर मिलाकर सेवन करें, शक्ति और वीर्य की वृद्धि होगी ।
18.रक्तातिसार)- इस रोग में अमरूद का मुरब्बा बड़ा लाभदायक सिद्ध होता है । अमरूद का मुरब्बा बनाने के लिए ताजा अध- पका अमरूद काम में लाना चाहिए । ऐसे अमरूद का मुरब्बा बहुत काल तक खराब नहीं होता ।
19.सुखी खाँसी)-इस खाँसी में रोगी खाँसते-खाँसते बेचैन हो उठता है, पर कफ जरा सा भी नहीं निकलता । जब ऐसी खाँसी चलती हो तो रोगी को चाहिए कि वह ताजे अमरूद को पेड़ से तोड़कर उसमें चाकू आदि बिना लगाये अपने दाँतों से काट-काटकर खूब चबा-चबाकर खावे । ऐसा दो-तीन दिन करने से सूखी खाँसी तर खाँसी में परिणत होकर धीरे-धीरे बिल्कुल ठीक हो जाती है ।




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