Mungfali-मूंगफली
Mungfali-मूंगफली(groundnuts), गरीबों का बादाम, जाड़े का मेवा, रास्ते का कलेवा, तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाला बादाम है । peanuts in hindi-peanuts को हिंदी में मूंगफली कहा जाता है।
इसका एक नाम चिनियाँ बादाम भी है। पर इसका जन्म-स्थान चीन नहीं है । इसका जन्मस्थान वस्तुतः दक्षिणी अमेरिका है जहाँ इसकी खपत व उपज शताब्दियों से हो रही है।
ऐसा भी अनुमान किया जाता है कि पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा मूंगफली सर्व- प्रथम ब्राजील से अफ्रीका लायी गई थी जो अपने जहाज में रखे गये हब्शी बन्दियों को शक्तिशाली बनाने के लिये इसका प्रयोग करते थे। उसके बाद तो यह बड़ी तेजी के साथ सारे यूरोप और पश्चिमी एशिया में फैल गयी । अंग्रेजी में मूंगफली को पी-नट, मंकी-नट,तथा मैनिला-नट' कहते हैं ।
भारत में मूंगफली (Mungfali) की पैदावार विशेषकर आन्ध्र प्रदेश, बम्बई, मद्रास, सौराष्ट्र, मैसूर तथा मध्यप्रदेश आदि में खूब होती है । भारत से २५००० टन मूंग- फली का तेल प्रति वर्ष विदेशों को निर्यात किया जाता है।
मूंगफली(Mungfali) की अब तक ५० किस्में पहचानी जा चुकी हैं । विश्व के व्यापार की ४० प्रतिशत मूंगफली केवल भारत में उत्पन्न होती है ।
मूंगफली(Mungfali) का पौधा बहुत छोटा होता है। इसकी ऊँचाई २ फुट से अधिक नहीं होती। इस पौधे के फूल से जो डण्ठल निकलता है वह पृथ्वी में समा जाता है और बीजकोष का आकार धारण कर लेता है। इनमें आमतौर से दो बीज होते हैं जो दो मास के अन्दर परिपक्व हो जाते हैं और तब पौधा पीला पड़ जाता है। उसके बाद पौधे को जमीन से उखाड़ कर उसे बीजों सहित सुखाया जाता हैं। ६ सप्ताह तक सूखने के बाद बीजों को पौधे से अलग कर लिया जाता है और खाने के काम में लाया जाता है।
मूंगफली की खेती बलुई जमीन में अच्छी होती है। इसके अलावा इसकी उपज बढ़ाने के लिये इसके खेतों में खाद देने की भी उतनी आवश्यकता नहीं पड़ती। वर्षा ऋतु के एक-दो-महीनों को छोड़ कर पूरे साल भर इसकी खेती अच्छी तरह हो सकती है । कुल छः सात महीनों में इसकी फसल तय्यार हो जाती है। अच्छी भूमि में मूंगफली की उपज प्रति बीघा १५ से २० मन तक हो जाती है।
मूंगफली में कैलोरी- Mungfali me Kelori
मूंगफली में जल ७.९ प्रतिशत, प्रोटीन २६.७ प्रतिशत, चिकनाई ४०.१ प्रतिशत, खनिज लवण १.९ प्रतिशत, रेशा ३.१ प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट २०.३ प्रतिशत, कैल्सियम ००५ प्रतिशत, फॉस्फोरस ०.३९ प्रतिशत, लोहा (मि० ग्राम) १६, कैलोरी ५४९, विटामिन ए ६३, विटामिन बी (मि० ग्राम) ०.९०, निकोटिनिक अम्ल (मि० ग्राम) १४१, रिबेफ्लेबिन बी २ (मि० ग्राम) ०.१३ होता है ।
जैतून के तेल में पाये जाने वाले लगभग सभी गुण मूंगफली के तेल में मिलते हैं।
भरपेट भोजन कर लेने के बाद मूंगफली नहीं खानी चाहिए । इसी प्रकार भोजन के साथ भी इसे खाना ठीक नहीं है। भोजन करने और मूंगफली के खाने के बीच कम से कम ३-४ घंटे का अन्तर होना चाहिए,तभी मूंगफली पौष्टिक सिद्ध होती है। मूंगफली एक बारमें आध पाव से अधिक नहीं खानी चाहिए। इसे खाकर पानी या चाय पीना भी ठीक नहीं है। मूंगफली को यदि खूब चबाचबाकर और गुड़ के साथ खाया जाय तो कब्ज नहीं करती और लाभप्रद सिद्ध होती है।
३-मूंगफली के १० उपयोग भोजन सम्बन्धी
मूंगफली का सलाद-Mungfali ka Salad
मूंगफली कच्ची पाव छटांक, किशमिश आधी छटाँक, दो पके केले, एक नारंगी, तथा एक छटाँक मीठा दही लेकर सबको एक साथ हल कर लें, मूंगफली का स्वादिष्ट सलाद तय्यार हो जायगा।
मूंगफली का दूध-Mungfali ka Dudh
मूंगफली का दूध बनाने के लिये मूंगफली की गिरियों को साफ करके भून लीजिए। भूनने के बाद उनका लाल छिलका, सड़ी-गली गिरियाँ और नन्ही-नन्ही किनकियों को अलग कर दीजिए। फिर शेष साफ गिरियों को कूटकर या मशीन द्वारा उनकी पतली लुग्दी बना लीजिए। इस लुग्दी में से २० प्रतिशत तेल निचोड़कर निकाल दीजिए । तत्पश्चात् लुग्दी से ७ गुना पानी उसमें मिलाकर घोल बना लीजिए। इस घोल को कपड़े से छान लीजिए ताकि उस घोल में से मोटे कण निकल जायें। अब उस छने हुये घोल को भाप द्वारा उबालिए और उसमें ३०-४० मिनट तक भाप को बुलबुलाइए। ऐसा करने से मूंग- फली के तेल की बदबू उसमें से निकल जायगी । अन्त में उसे ठंढा करके बोतल आदि में भरकर रख लीजिए। यही मूंगफली का दूध है। मूंगफली की एक पौण्ड साफ गिरी से ७-८ पौंड दूध तय्यार हो जाता है ।



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