Tarbuj-तरबूज
Tarbuj ग्रीष्मकाल का मधुर फल है। स्वाद में यह मीठा, फीका तथा रुचिकर होता है, तथा स्निग्ध (चिकना) होता है। इसे watermelon in hindi में Tarbuj कहा जाता है।
यह बहुत अधिक रस वाला होता है। इसका स्वाद मीठा और प्रकृति ठंडी होती है। यह ग्राही, शीतल, भारी, आंखों को ताकत देने वाला, अत्यंत बलवर्धक है। ठंडा होने के कारण यह पित्तजन्य रोगों में लाभ करता है. अर्थात् गर्मी का शमन करता है।
इसके सेवन से मूत्र साफ आता है और शरीर के अंदर की जलन शांत हो जाती है। साथ ही यह कफवर्धक भी है। यदि सुपारी आदि खाने से शरीर में कोई विकार हो जाए, तो तरबूज का सेवन लाभ करता है। दिल और दिमाग को ताजगी प्रदान करता है। तरबूज का सेवन भोजन करते हुए बीच में या खाने के एक घंटे बाद करना उत्तम है।
Tarbuj khane ke Fayde-तरबूज खाने के फायदे
सिर-दर्द-सिर-दर्द कई प्रकार का होता है। ऐसे सिर-दर्द के लिये जो गर्मी के कारण हो, नीचे लिखे टोटके लाभदायक हैं। केवल यह देख लिया जाए कि रोगी में गर्मी के चिह्न पाए जाते हैं या नहीं, अर्थात् यदि रोगी का सिर हाथ लगाने पर गर्म अनुभए हो, या रोगी को सिर-दर्द की शिकायत आंच के निकट बैठने या धूप ने चलने-फिरने के कारण शुरू हो तो ये नुम्ने लाभदायक है ।
तरबूज-Tarbuj का गूदा मलमल के वारीक तथा स्वच्छ रूमाल मे डाल कर निचोडें और रस को कांच के गिलास मे डालकर थोडी मिश्री मिला कर प्रात पिलाना चाहिए, आराम होगा। तरबूज के वीज या गिरी उरल या कूडी इत्यादि मे डाल कर और पानी मिलाकर खूब घोटें कि मक्खन के समान मुलायम लेप वन जाए । रोगी के सिर पर यह लेप कर दे, सिर-दर्द तुरन्त ठीक हो जायगा ।
वहम और पागलपन-यदि रोगी के वहम की तीव्रता के कारण पागलपन का भय हो रहा हो, दिन-भर इसी प्रकार के विचार सताते रहते हो,नींद बहुत कम पाती हो तो निम्नलिखित नुक्से उपयोग मे लाएं। इनके निरन्तर उपयोग द्वारा इक्कीस दिन मे यह रोग दूर होकर रोगी स्वस्थ हो जाता है।
(1) तरबूज-Tarbuj का गूदा निचोड कर निकाला हुआ एक कप रस गाए का दूध एक कप, मिधी तीस ग्राम-एक सफेद बोतल मे डाल कर रात्रि-समय चाँद के प्रकाश में किसी खूटी आदि से लटका दें और प्रात निराहार रोगी को पिला दें, ऐसा इक्कीस दिन निरन्तर करते रहें, दिनोदिन वहम मिटता जाएगा।
(2) पन्द्रह ग्राम तरबूज के बीज की गिरी-रात्रि-समय पानी में भिगो दें और प्रात घोट कर इसमे तीस ग्राम मिश्री तथा पचास ग्राम गाए का मक्खन मिला कर सेवन कराने से वहम दूर हो जाता है । इसमे यदि चार दाने छोटी इलायची भी मिला लें तो उत्तम है ।
प्यास की तीव्रता-जिस व्यक्ति को बार-बार प्यास लगती हो और वह बार-बार पानी पीकर भी मन्तुष्ट न होता हो, उसके लिए तरबूज-Tarbuj सेवन एक सर्वोत्तम चिकित्सा है । क्योकि इससे मन प्रसन्न होकर सन्तुष्टि हो जाती हैं। आवश्यकतानुसार तरबूज का पानी निकाल कर कांच के गिलास मे भर लें और इसमे थोडी मिस्री या सकजबीन मिला कर पिलाएं, बस अन्दर पहुँचने की देर है प्यास तुरन्त दूर हो जाती है।
यदि प्यास की शिकायत क्षणिक हो तो दो या तीन बार मे, वरन् पुरानी होने की हालत मे निरन्तर सात-आठ दिन तक पिलाते रहने से पूर्ण स्वस्य हो जाता है।
हृदय धड़कन-तरवूज की गिरी एक तोला पानी में घोट छानकर मिश्री या चीनी से मीठा करके ठण्डाई के रूप मे दिन में दो-तीन वार पिलाएं। दिनोदिन इनका लाभ अनुभव होता जाएगा। इससे हृदय धडकन और हृदय की कमजोरी को पूर्ण आराम हो जाता है। एक रोगी जो कि दिन मे दो-तीन वार मूछित होकर गिर जाया करता था, इस उपचार से स्वस्थ हो गया ।
कब्ज-कब्ज के लिए भी कई दिन तक तरबूज का उपयोग करना लाभदायक है, क्योकि जहा तरबूज खाने से मूत्र जारी होता है वहीं शोच भी खुल कर होता है । निरन्तर दस दिन खाकर देखिये, फिर कहिएगा कि कब्ज कहा गई।
सूजाक-तरबूज मे ऊपर से इस ढग से छिद्र करें कि इसे निकाले हुए टुकडे से फिर बन्द किया जा सके । अब इसमे शोरा कलमी आठ ग्राम और मिसरी आठ ग्राम डालकर फिर ऊपर से बन्द कर रात्रि समय चादनी में रख दें। प्रात मलमल के स्वच्छ रूमाल से छान कर काच के गिलास मे रोगी को पिलाए, सात-दिन मे सूजाक को अवश्य आराम होगा।
गर्मी का ज्वर-वैद्यो ने ज्वर हो जाने के बहुत से कारण वताए हैं। उनमे एक यह भी है कि मनुष्य धूप में अधिक चलने फिरने से भी ज्वर मे अस्त हो जाता है। इसलिए यहाँ ऐसे ज्वर की ही चिकित्सा दी जा रही है जो गर्मी के कारण हुआ हो । ऐसे ज्वर के लिये तरबूज एक बहुत बढिया उपचार है । दिन में दो-तीन बार इच्छानुकूल तरबुज खाइये, ज्वर उतर जाएगा।
बवासीर-बवासीर एक ऐसा रोग है जिनके पजे मे आजकल नबे प्रतिशत लोग जकडे हुए हैं । बवासीर के लिए यहाँ एक कई वार का अनुभूत चमत्कारी नुस्खा दिया जा रहा है जो कि अत्यन्त सुलभ और सरल होने के बावजूद बहुत गुणकारी है।
एक बढा और अच्छा तरबूज लेकर ऊपर से एक टुकडा चाकू या छुरी से काट लें, और इस तरबूज में सवा-सौ ग्राम मजीठ और सवा-सौ मिश्री कूजा चढिया या बीकानेरी मिश्री वारीक करके डालें ऊपर से वहीं कटा टुया टुकडा लगा दें।
अब इसे किसी अनाज की बोरी मे पन्द्रह दिन तक पडा रहने दें और तत्पश्चात् निकल लें । तरबूज मे से जो रस निकले उसे मलमल के स्वच्छ रूमाल द्वारा निचोडें और शीशी में डाल रखें।
सेवन-विधि-सारा रस सात रोज मे पी ले, बवासीर मे छुटकारा मिल जाएगा । गर्म पदार्थ विशेषत मिर्च, लहसुन, गुड तथा बैगन इत्यादि से परहेज करें और भोजन मे मूंग की दाल, रोटी, दूध-घी इत्यादि ही रहे।



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