Fennel seeds in Hindi-सौंफ खाने के फायदे
Fennel seeds in Hindi-सौंफ खाने के फायदे-सौंफ का प्रयोग मुंह की शुद्धि के लिए किया जाता है। सौंफ की तासीर ठंडी होती है। सौंफ (Saunf) का प्रयोग रात के खाने के बाद करने से पेट की सभी प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं।
उदर की वायु दूर करने में यह रामबाण साबित होती है। यह आंतों में होने वाले मरोड़ों को शान्त करती है। बच्चों के उदरशूल को भी यह दूर करती है। इसके प्रयोग से मूत्र सहज और साफ आता है। अजीर्ण आदि से होने वाले दस्तों के लिए भी अति उत्तम औषधि है।
सौंफ का काढ़ा बनाकर पीने से ज्वर की तेजी कम हो जाती है। यह शीतल और पाचक गुण प्रधान है। यह मेधा एवं स्मरण-शक्ति को तीव्र बनाती है। रक्तवाही संस्थानों को शुद्ध करती है। आमाशय की गर्मी दूर करती है।
दिमाग की कमजोरी-सौफ और मिश्री प्रति आठ ग्राम। दोनो बारीक करके चूर्ण बनाए और इसमे बादाम गिरी (छिलका रहित) सात दाने कूटकर मिला दें। रात्रि समय गरम दूध के साथ उपयोग करें। इसके पश्चात् पानी बिल्कुल न पीए । चालीस दिन के सेवन से दिमाग इतना शक्तिशाली हो जाएगा कि चश्मे की आवश्यकता नहीं रहेगी।
दिमाग की गर्मी-यदि दिमाग में गर्मी हो या कमजोर हो तो सौंफ दस ग्राम, बादाम गिरी सात दाने, छोटी इलायची तीन दाने आधा किलो पानी में घोटकर तथा उचित मात्रा मे मिश्री मिला कर और कपडछन कर दैनिक प्रात व साय उपयोग करें, औसधि की औसघि और ठण्डाई की ठण्डाई है।
नींद न आना-नीद न आना एक बहुत बडा रोग है। इसके लिए सौंफ दस ग्राम आधा किलो पानी मे उवालें, सवा-सौ ग्राम पानी वाकी रहने पर इसमे चौथाई किलो गाय का दूध और पन्द्रह ग्राम गाय का घी और प्रावश्यकतानुकूल चीनी मिलाकर उपयोग करें, शर्तिया लाभ होगा और नीद आने लगेगी।
अधिक नींद-नीद की अधिकता के कारण यदि तबीयत हर समय सुस्त रहती हो, या हर समय नीद ही आती रहे तो इसके लिए भी सौफ एक अच्छी वस्तु है।
- परन्तु सेवन-विधि पृथक है : सौंफ दस ग्राम आधा किलो पानी में उबालें और चौथाई रहने पर उतारकर दो ग्राम नमक मिलाए और दोनो समय पिलाए ।
नजला व जुकाम-सौंफ पन्द्रह ग्राम, लोग सात दाने-दोनो एक किलो पानी मे उबालें, चौपाई पानी रहने पर पन्द्रह ग्राम मिश्री या देशी चीनी मिलाकर चाय के रूप मे घुट-घूट पी लें। दो-तीन बार के उपयोग से नजला व जुकाम दूर हो जाता है।
आंखे दुखना-आढाई-सौ ग्राम सौंफ दो किलो पानी के साथ ताबे के बर्तन में रात्रि-भर भीगने दें और दूसरे दिन आच पर पकाए, । चौथाई पानी रहने पर उतारें और तनिक ठण्डा होने पर हाथो से मल कर किसी स्वच्छ कपड़े में छान लें। अब इस पानी को घीमी आच पर पकाएं और मधु की तरह गाढा होने पर उतार लें और किसी स्वच्छ तथा मजबूत कार्क वाली शीषी में रखें। यह दुखती आंखो की अत्यन्त लाभदायक औषधि है। रात्रि समय दो-दो सलाइयां आंखो मे डालें, बहुत जल्दी लाभ होगा।
कमजोर नजर-हल्की-हल्की चोट मे सौंफ कूट लें ताकि इसका छिलका उतर जाए । रात्रि समय तीस ग्राम (नाजुक मिजाजो के लिए पन्द्रह ग्राम), पानी या दूध से लेते रहें, दृष्टि को तेज करती है, नजर चील की तरह तेज हो जाती है।
●अढाई-सौ ग्राम सौफ साफ करके कांच से बर्तन में डालें और इस पर वादामी 'रग की गाजरो का एक कप रस डालकर किसी कपडे से ढक दें। जब रस सोख ले तो इतना ही रस और डाल दें, तीन बार ऐसा करें। तत्पश्चात् खुस्क कर चूर्ण बना लें और बराबर वजन मिश्री मिलाएँ।
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गुण-धर्म दृष्टि तेज करने के लिए पन्द्रह ग्राम रात्रि समय दूध के साथ उपयोग करें। ।
वाल-शर्बत-सत्तर ग्राम सौंफ आधा किलो पानी में उबालें, आधा 'पाव पानी रहने पर छान लें और तीन ग्राम सुहागा (खील) तया अढाई-सौ ग्राम चीनी मिलाकर चाशनी बनाएँ।
गुण-धर्म नन्हे बच्चो का पाचन ठीक करने के लिए यह एक विचित्र गुणकारी औषधि है, जिसे वाल-शर्बत भी कह सकते हैं।
हैजा-सौफ पन्द्रह ग्राम, पुदीना दस ग्राम, लौंग चार दाने तथा गुलकन्द तीस ग्राम | सवको दो कर पानी में उबालें, आघा पानी रहने पर छान लें और ठण्डा कर थोडा-थोडा पिलाएं। हैजे की यह उत्तम प्रौषधि है, कुछ बार पिलाने से ही आराम हो जाता है ।
सीने का दर्द-खुसक सौंफ पन्द्रह ग्राम, पीपल पाच ग्राम-दोनो को आधा किलो पानी मे उबालें, चौथाई पानी रहने पर छान कर एका ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पिलाने से छाती का दर्द दूर हो जाता है ।
रुका मासिक-धर्म-सौंफ तीस ग्राम और गरम मसाला पचास -ग्राम-दोनो तीन कप पानी मे उबालें । एक कप रहने पर छानकर गरम - गरम पिलाए और लिहाफ ओढ़ा कर रोगिणी को लिटा दें। दो-तीन वार उपयोग करने से मासिक धर्म खुलकर हो जाएगा ।
कमजोर मूत्राशय-सौफ और बडी हरड का छिलका बराबर वजन बारीक कूटकर कपडछन करें और तीन-तीन ग्राम प्रात व साय ताजा पानी के साथ उपयोग करें । मूत्राशय की कमजोरी के कारण बार बार मूत्र आता "हो, या स्वप्न मे निकल जाता हो तो इससे आराम आ जाता है। यह मात्रा -सोलह वर्ष से ऊपर आयु वालो के लिए है। बच्चो को आयु-अनुसार दें।
पुराना नजला व जुकाम-बढिया सौफ के एक किलो चावल निकालकर एक किलो देशी चीनी या मिश्री और अढाई-सौ ग्राम गाय का घी मिलाए । पुराना जुकाम, नजला तथा दिमाग को कमजोरी में निरतर एक मास तक उपयोग करने से लाभ हो जाता है। मात्रा : प्रात. व साय पन्द्रह-पन्द्रह ग्राम।
नोट . इनमे पहले कब्ज का इलाज करना आवश्यक है । क्योंकि कब्ज की सूरत में किसी ओषधि में लाभ न होगा।
बच्चों के मरोड़ - बच्चों के मरोड एकदम बन्द कर देना कई बार घातक सिद्ध होता है । इसलिए निम्नलिखित नुक्से की आवश्यकता इसलिए भी है कि इनसे हानि का कोई भय नहीं, बल्कि लाभ ही होगा। सौंफ तीन ग्राम और गुलकन्द छह ग्राम को आधा कप पानी में उबालें । आधा कप पानी रहने पर उतारकर छान लें और पिलाए । दिन में तीन बार देना चाहिए।
प्रमेह व स्वप्नदोष-सौंफ की गिरी सत्तर ग्राम, अजवाइन तीस ग्राम, सोठ तीस ग्राम, काला नमक बीस ग्राम-सब बारीक कूटकर लें। तीन से पांच ग्राम तक प्रात. व साय भोजनोपरान्त जल के साथ उपयोग करें, थोडे दिन में ही लाभ होगा।
खुजली-खुजली की दो प्रकार हैं . खुश्क व तर । खुश्क मे खुजलाने से कुछ नहीं निकलता परन्तु तर खुजली मे खुजलाने पर खून या पीला-सा पानी निकला करता है। कई बार खुजली ऐसा हठीला रोग प्रमाणित होता है कि वेचारा रोगी जुलाव ले-लेकर तथा मालिशो से तग आ जाता है, पर लाभ तनिक भी नहीं होता । निम्नलिखित नुस्खे के उपयोग से सब प्रकार की खुजली कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है। यह औषधि ऐसे रोगियो पर आजमाई गई है जिन्हें किसी भी औषधि से लाभ न होता था ।
सौंफ और धनिया-दोनो बरावर वजन । बारीक कूटकर इसके डेढ गुना घी और दो गुना चीनी मिलाकर सुरक्षित रख लें ।
गुण-धर्म . दोनो समय तीस-तीस ग्राम उपयोग करने से रक्त विकार, खुजली, प्रमेह, कमजोर दृष्टि में आराम होता है ।
गभिणी की कब्ज-यदि गभिणी को कब्ज हो जाए तो इसके लिए सेज कब्ज नाशक औषधि का उपयोग घातक होता है। गभिणी को निम्नलिखित नुस्खा सेवन कराए ।
सौंफ के चावल डेढ-सौ ग्राम, गुलकन्द तीन-सौ ग्राम । सौंफ को बारीक कूटकर गुलकन्द में मिलाकर रखें । आवश्यकता समय तीस ग्राम तक गरम दूध मे उपयोग की जानी चाहिए ।



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