Tulsi ke fayde-हमारे पूर्वजो ने तुलसी की बहुत प्रशसा की है । इसका कारण यह है कि इसमें जिवानामृत जैसे द्रव विद्यमान है।यह दो प्रकार की होती है-हरी और काली। हरी तुलसी मे कुछ कम गुण नही होते, परन्तु काली तुलसी की तो बात ही निराली है।
- पौरुष-बल वर्द्धक-तुलसी के बीज मे पौरुष निर्वलता दूर करने का स्वाभाविक गुण है । इसके उपयोग से पतला वीर्य गाढा होता है तथा उसमे वृद्धि होती है । शरीर मे वास्तविक गर्मी और शक्ति उत्पन्न होती है। गैस और कफ से उत्पन्न होने वाले अनेक रोग ख़तम हो जाते हैं । आए दिन बेशुमार युवक इश्तहारी पौरुष-बलवर्द्धक ओसधियो के पीछे भागते हैं। यदि वे तुलसी के बीज पीसकर बराबर वजन गुड मिलाकर डेढडेड माशे की गोलियां बना लें और प्रात व साय गाय के ताजा दूध के साथ एक-एक गोली उपयोग करें तो पांच सप्ताह मे ही उनकी समस्य चिन्ता दूर हो जायगी।
●तुलसी के वीज लेसदार तथा वीर्य-बलवर्द्धक होने के नाते वीर्य विकार में उपयोग किये जाते है।
तुलसी के बीज प्रात या सायं छह छह माशे फाँक कर ऊपर से गुनगुना दूध पीया जाए तो इसके निरतर उपयोग मे वीर्य गाढा हो जाता है ।
- ज्वर-सर्दी के ज्वर मे तो तुलसी विशेष काम करती है। इसके उपयोग से मर्दी छाती में नहीं उतरने पाती, और छाती मे उतरी हुई सर्दी कफ के रूप मे बाहर निकल जाती है । छाती का दर्द भी कम हो जाता है। तुलनी के पत्तो का रस एक-दो तोले डेढ से तीन मासे तक चूर्ण काली मिर्च मिलाकर पीने में तीव्र से तीन ज्वर भी ठीक हो जाता है।
तुलसी की पत्तियां और काली मिर्च की गोलियां मलेरिया के लिए कोनीन का काम करती हैं । तथ्य यह कि तुलसी के रस में मलेरिया के -कीटाणु नष्ट करने का अद्भुत गुण है ।
अपको एक तोला काली मिर्च लेने है ओर सोलह पहर तक तुलसी के रस मे खुब रगडकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लेनी है, उसे सुखाकर शीशी मे रखें। एक से लेकर तीन गोली तक आयु-अनुसार सर्व प्रकार के ज्वर के लिए दिन मे तीन वार तक दे सकते हैं । तेज से तेज ज्वर भी ठीक हो जाएगा। तुलसी की पतिया और काली मिच की गोलिया मलीरेया के लिए कोनीन का काम करती हैं । तथ्य यह कि तुलसी के रस में मलेरिया के -कीटाणु नष्ट करने का अद्भुत गुण है ।
अपको एक तोला काली मिर्च लेकर सोलह पहर तक तुलसी के रस मे रगडकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लें, सुखाकर शीशी मे रखें। एक से लेकर तीन गोली तक आयु-अनुसार सर्व प्रकार के ज्वर के लिए दिन मे तीन वार तक दे सकते हैं । तेज से तेज ज्वर भी ठीक हो जाएगा ।
तुलसी के ताजा या खुश्क पत्ते छह माशा, सोठ, दारचीनी, इलायची, सौंफ प्रत्येक एक-एक माशा मलकर चाय बनाए और मौसमी बुखार, के दिनों मे पीएं बुखार खाँसी और सीने की खरखराहट के लिये अत्यन्त लाभप्रद है। मेदे को बल मिलता है तथा जुकाम को ठीक हो जाता है । मलेरिया के मौसम मे दो-चार दाने काली मिर्च और तुलसी के पत्ते चवा लेना स्वास्थ्य रक्षा के लिए उत्तम है।
- मलेरिया की अचूक औषधि-दस तोले तुलसी के पत्तो के रस में एक तोला चूर्ण छोटी इलायची मिलाकर ,इतना कुट पीस लें कि दो दो रत्ती की गोलियाँ बन सकें। मलेरिया ज्वर के लिए अत्यन्त ही लाभप्रद औषधि है, प्राय प्रथम मात्रा देने से ही ज्वर में अराम मिल जाता है वरन् दो-तीन वार देने से तो निश्चय ही आराम हो मिलता है।
अपको ताजा तुलसी का रस तथा काली मिर्च बराबर वजन खरल करके दो-दो रत्ती की गोलियाँ बना कर रख लेनी है । मात्रा व सेवन विधि ऊपर बाताये गय अनुसार है।
- जुकाम और खांसी-खुश्क पत्तो का काढा जुकाम, खाँसी तथा दस्तो की बढिया घरेलू दवा है । तुलसी के रस मे बलगम को पतला कर खारिज कर देने का गुण होता हैं, इसी कारण यह जुकाम और खाँसी मे लाभप्रद है। यदि हम तुलसी के रस मे मधु, अदरक और प्याज का रस उचित मात्रा मे मिलाएं तो यह खांसी और दमे के लिए एक अक्सीर बन जाती है । इस उद्देश्य के लिए केवल मधु मक्खी के सहद के साथ उपयोग करना भी अत्यन्त उपयोगी है । वैदिक चाय-तुलसी का रस, गोरख पान बूटी, सुर्ख चदन और सौफ हरएक एक पाव, दारचीनी, तेजपात, वडी इलायची, सगध बाला, मुलेठी हरेक आध पाव, लौंग लगभग एक तोला,सभी सामग्री बारीक करके मिला कर रख लेनी है।
विधि आधा सेर पानी मे छह माशे वैदिक चाय डालकर उबालें । दो-तीन उबाल आ जाने पर नीचे उतारकर छान लें और इच्छानुकूल दूध चीनी मिलाकर चाय के समान पीएँ । दिन में एक-दो बार यह चाय उपयोग की जा सकती है।
- गुण-धर्म स्वदेशी जड़ी बूटियो से बनी यह चाय अत्यन्त गुणकारी तथा सुगधित है। नजला-जुकाम, खासी, सिर-दर्द और कब्ज आदि के लिए उपयोगी है । दिल-दिमाग व मेदे को शक्ति प्रदान करती है। बाजारी चाय से कई गुना वढिया यह चाय पौरुप बलवर्द्धक भी है । इस पर भी खूबी यह कि तनिक भी नशीली नहीं। इसलिए जिन्हे चाय की आदत पड़ चुकी है उनके लिए यह एक अत्यन्त बढिया पेय है, चाय की आदत छोडकर इसका उपयोग प्रारम्भ कर दें।
- साप काटे की दवाई -यदि साप काटे व्यक्ति पर तुलसी उपयोग को जाए तो उसके प्राण बच जाने की बहुत ही अधिक सम्भावना रहती है। साप काटने पर तुरन्त एक मुट्ठी तुलसी की पत्तिया खा लेनी चाहिए और साथ ही काटे स्थान पर तुलसी की जड़ मक्खन में घिसकर लगानी चाहिए । सुरु मे इस लेप का रग श्वेत रहेगा परन्तु ज्यो-ज्यो यह विष फेलेगा वह काला पडता जाएगा । जब इसका रग अच्छी तरह काला दिखाई देने लगे तो इसकी बजाए दूसरा लेप लगा देना चाहिए। यह लेप तब तक बदलते रहना चाहिए जब तक कि इसका काला पडना बद न हो। जब यह लेप काला न पडे तब समझना चाहिए कि अब विष का प्रभाव नष्ट हो चुका है ।
भला जो तुलसी साप का विष दूर करने की शक्ति रखती है वह विच्छू, भिड आदि विषले कीडो का विष क्यो नही उतारेगी ? भिड या विच्छू के डक पर तुलसी के पत्तो के रस मे सेंधा नमक मिलाकर रगडने मे विच्छू का विष दूर हो जाता है।
Tulsi in Hindi
- त्वचा विकार-तुलसी के पत्तो का रस और नीबू बराबर वजन मिलाकर दाद, खुजली तथा अन्य त्वचा रोगो मे मालिश करने से भरसक लाभ होगा। #इस अर्क की यदि चेहरे पर मालिश की जाए तो चेहरे के काले धब्बे तथा छाइया दूर होकर रग निखरता है।
घाव को कीटाणुआे से सुरक्षित रखने के लिए तुलसी की खुश्क पत्तियो का चूर्ण छिडका जाता है।
इसकी पत्तियो के काढे से गदे घाव धोने से बहुत लाभ होता है । तुलसी का तेल-तुलसी की पत्तियाँ, फूल, टहनी और जड, यानि तुलसी का पूरा पौधा लेकर कूट ले । यदि यह समस्त सामग्री एक सेर हो तो आधा सेर पानी मिला दें, साथ ही आधा सेर तिल का तेल भी डालें। अब इस घोल को धीमी-धीमी आंच पर पकाएँ । पानी जल जाने और तेल वच रहने पर मल छान लें । यह तेल सर्व प्रकार के घाव यहाँ तक कि प्रदाह के घाव तक ठीक कर देता है।
श्वेत दागो पर भी यह तेल दिन मे दो-तीन वार लगाया करें। तेल लगाने से पहले दागो को कपड़े से रगड लेना चाहिए ।
यदि खुजली के कारण शरीर पर फुसियां हो गई हो तो इसी तेल की मालिश करनी चाहिए।
- पेट के रोग-तुलसी की पत्तियो का रस एक तोला दैनिक प्रात. पीने से मरोड और अजीर्ण मे गुणकारी है ।
तुलसी की पत्तियो का रस पेट के कीडे मारता है।
यदि बच्चे को उबकाई पाती हो और किसी ओषधि से बद न होती हो तो उसे थोडे मधु मे तुलसी का रस मिलाकर देने से तुरन्त लाभ होगा।
यदि बच्चे के पेट में दर्द हो तो तुलसी और अदरक का रस बरावर वज़न करके थोडा गरम कर बच्चे को पिलाइये जय तो, तुरन्त दर्द वन्द होगा। यदि वच्चे को इस औषधि को रोज दिया जाए तो उसके पेट मे कभी कोई विकार उत्पन्न नही होगा।
यदि बच्चे को शौच साफ न होता हो या उसका पेट फूल जाता हो तो उसे तुलसी की पत्तियो का गुनगुना रस पिलाइये । इससे शौच ठीक होगा और पेट का अफारा तथा ऐसे ही अन्य विकार भी दूर होते हैं ।
जिस व्यक्ति का हाजमा कमजोर हो, दिमाग कमजोर हो, शरीर में किसी प्रकार की गर्मी अनुभव होती हो-उमे गर्मी के दिनो मे प्रातः तुलसी की पाच-सात पत्तियां, सात सात दाने बादाम, चार छोटी इलायची और काली मिर्च-सब घोटकर दूध और मिश्री मिलाकर पिलाइये । दो-तीन दिन मे ही लाभ होगा।

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